एक दिन ऑफिस की महिला सहयोगी के घर पर जाकर चोदा

Jan 12, 2026 - 11:53
Jan 13, 2026 - 19:36
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एक दिन ऑफिस की महिला सहयोगी के घर पर जाकर चोदा

एक दिन ऑफिस की शादीशुदा लड़की ने मुझे घूरते हुए देखा। वो धीरे-धीरे मेरे पास आई, बातें शुरू कर दीं। कुछ समय बाद वो मुझसे सेक्स के बारे में बात करने लगी। एक शाम उसने मुझे अपने घर चलने को कहा।.

भई, सुनो तो एक बात – ये कहानी है असली। पल-पल धमाल मचा देने वाली।.

दिल्ली में ही मेरी नौकरी थी। काम पर वहाँ तीन लड़कियों का साथ मिला।.

एक को पूजा कहते थे। मान लीजिए, वह नाम गढ़ा हुआ था।.

सास के घर से तुरंत बाहर निकलने पर मजबूर होना पड़ा।.

पहले तो मैंने उसके बारे में कुछ खराब नहीं सोचा।.

फिर भी, कभी-कभी उसकी नज़रें मेरे ऊपर टिक जाती थीं।.

हर बार जब हमारी आँखें मिलती थीं, मैं चुपचाप दूसरी ओर देख लेता।.

इसी तरह घड़ी के काँटे चुपचाप आगे बढ़ते रहे।.

तब करीब चालीस दिन हो चुके थे, सुबह-सुबह मैं काम पर पहुँच गया।.

मेज़ के किनारे सिर टिकाए बैठा था मैं, धड़कनों भरा सरदर्द चुपचाप घेर रहा था।.

थोड़ी देर के बाद एक मधुर ध्वनि सुनाई दी - हाय…

आँखें ऊपर उठीं, तब पहले नज़र पड़ी पूजा भाभी की छवि।.

पीले सूट में वो ऐसी लग रही थी, मानो हर ओर तहलका मचा दे।.

उसने तुरंत प्रतिक्रिया दी, जब मैंने सिर्फ हाय कहा। क्या बात है? इस अजीब तरह से क्यों चुपचाप बैठे हो?

सिर में तकलीफ है… कुछ खास नहीं।.

सिर दबाऊँ? पूजा, आओ।?

मैं- नहीं.

फिर वो ख़ामोशी से मेरे माथे पर हाथ फेरने लगा।.

हाथ लगते ही बिजली कौन से तरफ से आई, पता ही नहीं चला।.

अचानक मेरा दिल धड़क उठा - छोड़िए ये सब। कहीं कोई नजर आ जाएगा तो बुरा मानेगा।!

मुस्कान उनके चेहरे पर फैल गई, पूजा भाभी की आँखों में शरारत साफ झलक रही थी।?

खामोशी से सिर झुका लिया, हल्की मुस्कान छोड़ता हुआ।.

बोली पूजा भाभी ने, सिर झुकाकर - अब क्या चुप? खोल दो तो सच।!

चुप रहने की वजह थी शर्म।.

आंख मारकर पूजा बोली - कहीं हम दोनों को साथ में देखकर लोग कपल समझने लगेंगे?

सुनते ही मेरी आंखों का आकार बदल गया।.

मैं मुस्कुरा दिया.

फिर उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई।.

हाथ का स्पर्श गाल पर मुलायम था, उसके बाद एक झटके में चिकोटी लगी। वो फिर अपनी जगह चली गई।.

तभी से दिमाग में चल रहा सोचने का तरीका अलग हो गया।.

मेरी आँखों का रुख अब बदल चुका था।.

हम आँखें चुराते हुए एक-दूसरे की ओर झांकते, फिर मुस्कान छोड़ देते।.

बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ने लगा, थोड़ा-थोड़ा करके।.

एक-दूसरे को अपना नंबर दिया।.

बातचीत के दौरान माहौल गरमा गया। धीरे-धीरे सब कुछ अश्लील फिल्मों वाली स्थिति में बदलने लगा।.

लपटें हर ओर फैल गई थीं … महज़ एक साथ आने का वक्त रह गया था।.

उस दिन सुबह एक कॉल आई। सुनो... आज पूरा परिवार कहीं रिटायरमेंट की पार्टी में चला गया है। लौटेंगे कल दोपहर तक। शाम को तुम घर आ जाना।!

ठीक है जान, मैंने बिना सोचे कह दिया - पता भेज देना।!

ख़्वाबों की तलाश में जब वो चीज़ मिल जाए, जिसका इंतज़ार था, ख़ुशी अपने आप घर कर लेती है।.

अब सिर्फ शाम होने का इंतज़ार रह गया था, क्योंकि तभी मेरी ऑफिस की लड़की कहानी में एक अलग तस्वीर बन पाती।.

साढ़े तीन बजे शेविंग कर ली। फिर झाड़ू दाढ़ी समेटी। नहा धोकर खुद को संभाला। एक अच्छा सा इत्र चढ़ाया। छह बजे तैयार होकर निकल पड़ा। मन की पसंद के घर की ओर कदम बढ़ाया।.

बस घर के बाहर पैर रखा था कि पूजा का फोन आ गया - कहाँ हो तुम?

तेरे दिल के अंदर - मैं।!

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उसके मुँह से हँसी छूट गई। "बताओ तो सही," वह झूमते हुए बोली।!

कह दिया - तुम्हारी बात सुनकर चल पड़ा हूँ।!

ठीक है पूजा... ध्यान रखना, सावधानी से आना!

मैं- ओके जान!

रास्ते में एक पैकेट कंडोम लिया, फिर पूजा के घर पहुँच गया।.

दरवाजे के पीछे सन्नाटा था।.

कमरे के भीतर पहुँचकर सीधा मुख्य दरवाज़े की ओर बढ़ा। वहाँ लगी घंटी को दबा दिया।.

दरवाज़े पर उंगली का छोटा सा दबाव था, फिर आवाज़ भी नहीं हुई, अचानक वह सरककर खुल गया। पूजा वहीं खड़ी थी, सामने।.

गुलाबी नाइटी में वो किसी परी से कम ही क्या थी।.

आँखें आपस में मिलीं… और बिना कुछ सोचे मैं उसकी छाती की ओर देखने लगा।.

मुस्कान उसके चेहरे पर थी, झिझकते हाथों से मेरा हाथ पकड़कर कमरे में खींच लिया। दरवाज़ा बंद हुआ, ताला लग गया।.

क्या तुम वहीं से खाना खा लोगे?

उधर से पकड़ कर मैंने उसे वहीं के दरवाज़े से लगा दिया। हथेली कमर से होती पेट तक खिसक गई। धड़कते शरीर को मैंने अपने से चिपका लिया।.

उसके बोलने पर मैंने कहा - जहाँ से तुम कहोगी, वहीं से मैं अपनी जान दे दूँगा।!

उसकी हंसी छूट गई। फिर आवाज़ आई - तन पर आग सी लगी है, कहीं भी छेड़ दो मुझे।!

मेरा मुँह उसके गाल से छूटा, फिर गर्दन पर निशान छोड़ता हुआ।.

मुँह से पूजा भाभी की सिसकियां निकल पड़ीं - आह… इस्स्स… हाए… सीई… उफ्फ!

मेरी उंगलियाँ धीरे-धीरे उसके सीने पर फिर रही थीं।.

बीच-बीच में निप्पल पर हाथ आ जाता, तभी वह झट से सिकुड़ जाती - आह… इस्स्स… आह… सीई… आ… उउ… आह… कमजोर मत रखना।!

उसके एक स्तन के बीच में मैंने दो उँगलियाँ डालकर निपल को थोड़ा घुमाया, और फिर वह धीरे-धीरे गर्म हो उठी।.

होंठ दबोचकर पूजा भाभी ने कहा - इन्हें सिर्फ तोड़ोगे, या चखोगे भी!

अचानक मैंने उसके एक छाती के दूध वाले हिस्से को अपने मुँह में ले लिया। तभी भाभी धीरे से चीखी, फिर मेरे अंदर गर्म दूध डालने लगी।.

थोड़ा सा दूध मुझे निगलने में काफी हिम्मत लग गई।.

उसके दूध को मैंने मुँह में लिया, धीरे से चूसा। भाभी के होठों से आवाज़ फूट पड़ी - आह, सनम, ऐसे ही जारी रखो… आह, क्या मज़ा आ रहा है। एक तरफ छोड़कर दूसरे पर भी ध्यान दे रहे हो? आह, वहाँ भी गुदगुदी हो रही है।!

एक बार फिर मैंने अपना मुँह भर लिया, इस बार वो दूध था जो भाभी के पास था।.

थोड़ी देर बाद उसने मुंह से कहा - अब कुछ और करोगे, या बस इतना ही करके छोड़ दोगे?

लंबाई में वो इतना सख्त हो गया था कि पैंट के अंदर जगह नहीं बची।.

ऊपर से रगड़ता हुआ मैंने उसे पूजा की गांड पर जमकर मारा।.

मेरी मुट्ठी ने उसके चेहरे को सहारा दिया। फिर मैंने धीमे-धीमे उसके गुलाबी होंठों को अपने में खींच लियa।.

उसकी तरफ से हर कदम पर साथ मिल रहा था।.

फिर अचानक वो मेरे पास से हट गई। हाथ थामते हुए बेडरूम की ओर खींचा। कहने लगी - जान, तुम यही रुको। एक पल में कोल्ड ड्रिंक लेकर आऊँगी।!

वह बोली - फिर भीतर समा गई।.

थोड़ी देर बाद उसके हाथ में कोल्ड ड्रिंक से भरा गिलास था।.

पहले मैंने उसको पिलाया। बाद में, अपनी बारी आई।.

उसको मेरा अंदाज़ इतना गिरा कि आखें ही बदल गई।.

मुँह में कोल्ड ड्रिंक भरकर अब हम दोनों साथ पीना शुरू कर देते, फिर बचा हुआ खुद निगल जाते।.

हर सुबह उठकर मैं पहले तुम्हारे बारे में सोचता।.

ठंडी पीने वाली चीज़ खत्म हुई, तो मैंने बाहें फैला दी। वो मेरे सीने से टकरा गया।.

हाथ धीरे से पीठ के ऊपर से नीचे की ओर बढ़ा। गोल चूतड़ों तक पहुँचकर वो रुका। एक-एक को उठाकर दबाव डाला। मसलता रहा, बिना जल्दी किए।.

पूजा के पाँव ज़मीन से ऊपर हुए - आह… इस्स… हाए… सिसकते स्वर में छटपटाहट… अचानक झटका।!

उसकी नाइटी फेंक दी, मैंने सिर्फ एक लंबे किस के बाद।.

अब उसके पास कुछ नहीं था। सिर्फ एक अंडरवियर।.

मैंने जब तक सोचा, वो पहले ही कपड़े फेंक चुका था।.

ऊपर से उसकी चूचियों पर हाथ डाल दिया मैंने।.

फिर उसके होठों पर वही धुंधला सांस छूटने लगा - आह… इस्स्स… आह… सीई… आह… आ… उम्म्म!

उसके पीछे की ओर हाथ बढ़ाया, फिर धीमे से लाल ब्रा का तिरपाट खोल दिया।.

हवा में उनकी साफ़ छातियाँ लहरा उठीं।.

अचानक उसने एक को अपने मुँह में लिया, वहीं दूसरे हाथ से धीमे-धीमे दबाना शुरू कर दिया।.

पूजा के अंदर उमड़ती गर्मी बिखरने लगी। सांसें तेज हुईं, धीरे-धीरे घबराहट पैर पसारने लगी। "आह…" छोटी सी सिसकी फूटी। आवाज़ काँपी, टूटी हुई लय में दोहराया - "चूस… ओह…" शरीर झुका, माथे पर पसीने की एक बूंद लुढ़की। "इस्स्स…" ऐसे निकली जैसे ठंडी हवा में जलती लकड़ी। सब कुछ धीमा हो गया। फिर - एक लंबी सांस। "उ…" आवाज़ रखी, बिना खत्म हुए।!

उसकी पैंटी को मैंने सिर्फ मुँह से पकड़ा, धीरे से नीचे खींच दिया।.

उसके अंग पर नमी का आभास था।.

बैठने के बाद जब उसकी एक टांग कंधे पर आई, तो फिर चूत के हिस्से साफ दिखने लगे।.

पूजा के शरीर में झुरझुरी-सी दौड़ गई, जब उसके गीले और खारे होठों पर कोई मुंह टिका।.

एक उंगली से वहाँ का हिस्सा फैलाया, फिर धीमे से जीभ चल पड़ी।.

चूत से पानी बहने लगा, जब पूजा को उत्तेजित देखकर वह फटाक से।.

उसका सांस भारी हो गया - आह… इस्स्स… हल्का कंपकंपी के साथ आहत सी खींच… फिर एक धीमी पुकार… और फिर वो घुटी हुई आवाजें… आह… इस्स्स… आह… छाती में कुछ दबा सा लगा… उ… म्म्म… अचानक एक तेज चीख।!

उसने अपना पैर छोड़ दिया, फिर धीमी सांस के साथ शरीर ढीला पड़ने लगा।.

फिर मैं खड़ा हुआ, उसे नीचे बैठाया। पैंट उतारने के लिए कहा, धीरे से।.

अपनी पैंट के साथ-साथ वह निकर भी उतार बैठा।.

उसकी नज़र मेरे काँपते हुए शरीर पर पड़ी।.

उसके सिर को मेरी ओर खींचा, लेकिन जब बात आई तो मना कर दिया – ऐसा नहीं हो सकता।!

बात समझाने की कोशिश की, लेकिन वो मुझसे गले लगने पर ही राजी हुई।.

उस पल मैंने दबाव नहीं डाला।.

हाथों में लंड समेटकर वो चूमने लगी।.

अचानक उसने टोपी हटा दी। पूरे सिर पर धीमे से चुंबन किया गया।.

मेरे मुँह से आवाज़ निकली - ‘आआह…’ - जैसे ही उसके होंठ मेरे पास आए।.

उसके बाद मैंने उसे सुला दिया बिस्तर पर, एक के बाद एक टांगें फैलाईं, अब मैं था ऊपर।.

उसने होंठ चूसे, फिर अपनी सख्त लत पकड़ाए।.

उसने मेरे लंड को अपनी चूत के हिस्से पर घिसना शुरू कर दिया। साँस तेज हो गई - आह… इस्स्स… म्म्म… आआह… तुम्हारा काफी मोटा है!

मैंने उसके स्तन को मुँह में लिया, धीरे से खींचा। एक हल्की चपेट में छड़ अंदर जा पहुँची।.

मुंह से आह… सीई… की ध्वनि निकल पड़ी, जब घर्षण हुआ।.

कंडोम इस्तेमाल करने की सलाह उसने दी, सुरक्षा का ध्यान रखते हुए।.

ऊपर उठते हुए मैंने लौड़े पर कंडोम डाल दिया।.

एक तेज़ हलचल के बाद लंड पूरी तरह चूत में समा गया।.

पूजा के मुंह से निकला एक साँस - ऊउउ… फिर काँपती आवाज में ईईई… धीरे से झुक गई वो - मर गई… आह… लगा जैसे हवा थम गई… सी… फिर छाती उठी - आह… हम्म्म… और खुली आँखें - आह!

इसके बाद मैंने अपनी तेज़ गति से धक्के लगाना शुरू कर दिया।.

नीचे से पूजा का साथ मिला, उसने खुद को जमकर झोंका।.

अगर पीछे से सहयोग मिलता है, तो धमाकेदार लम्हों की चपेट में आना और भी तेज हो जाता है।.

एक के बाद एक, मैंने उसके दोनों स्तनों पर मुँह लगाया। वहीं, धीमे-धीमे अपना शरीर आगे बढ़ाया।.

उसका ध्यान पूरी तरह चुत की ओवर हालिंग में था।.

मैं उसके होठों पर हाथ फिरा रहा था, तभी वो मेरी गर्दन से चिपक गया। धीरे-धीरे सब कुछ आगे बढ़ गया।.

फिर भाभी ने कहा - अब मुझे छूट जाने दो। मैंने धीरे से कहा, हां, प्रोटेक्शन तो लगा है, मैं भी अभी-अभी खत्म करने वाला हूं।.

जैसे ही कंडोम का ख़्याल आया, वह बिलकुल बेकाबू हो गई। नीचे से कमर उठाते हुए लंड को पूरा भीतर तक खींचने लगी।.

तेज़ गति पकड़ ली मैंने।.

बारह से पंद्रह मिनट की तेज़ धुनाई के बाद हम दोनों एक साथ फूट पड़े, और मैं पूजा के ऊपर लुढ़क गया।.

उसके साथ मेरा पहला चुंबन हुआ, फिर दूरियाँ बढ़ती गईं।.

उस लड़की ने मुझसे सेक्स किया, फिर वो ऑफिस जाते हुए मुस्कुरा रही थी।.

फिर मैंने उससे पूछ ही लिया - तुम मुझे इतना क्यों अच्छे लगे?

वह बोली, मुझे पति के साथ शारीरिक संबंधों में सुख नहीं आता। जब वह दूर रहता है, मेरा क्या होता है? कभी-कभी मन में कई चीज़ें उठती हैं, तुम्हारे बारे में सोचने लगती हूँ। !

भाभी ने कहा, फिर वो मेरे साथ गले मिलकर मुझसे प्यार करने लगी।.

फिर से जब हम दोनों ने शारीरिक संबंध बनाने की ओर बढ़ना शुरू किया।.

उस दिन पूजा भाभी के साथ मेरा तीन बार संबंध हुआ, फिर मैं घर वापस आ गया।.

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