पड़ोसन भाभी को बाथरूम में नंगी करके खूब चोदा

desisexkahaniya

Jan 3, 2026 - 13:59
Jan 9, 2026 - 16:59
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पड़ोसन भाभी को बाथरूम में नंगी करके खूब चोदा

एक पड़ोस की भाबी के साथ मेरा रिश्ता कैसे गहरा हुआ, ये कहानी है उसी की। उनके साथ बिताए पल कभी आम नहीं थे। इश्क़ की शुरुआत धीमे-धीमे हुई, फिर बढ़ता चला गया। ख़्वाहिशों के पल ऐसे आए, जैसे कोई रोज़मर्रा की बात हो। अब वो लम्हे याद आते हैं, तो दिमाग़ में सिर्फ़ वो ही घूमती हैं।.

सबको नमस्ते, मैं हूँ आर्यन अग्रवाल। पचतीस साल की उम्र है मेरी। गेहूए जैसी त्वचा है, बिल्कुल साधारण ऊंचाई। दरअसल, जिम जाना मुझे खूब पसंद है। इसी वजह से शरीर मजबूत बना रहता है। पानीपत, हरियाणा में मेरा घर है। .

यह मेरी पहली कहानी है, जो मैं इस साइट पर लिख रहा हूँ। मेरा लंड 5 इंच का है, फिर भी किसी को भी खुश करने में सक्षम है। टीवी पर ब्लू फिल्म चलाकर भाभी के साथ चुदाई करने का ख्याल दिमाग में आता रहता है, क्योंकि ऐसा करने से दोनों अपनी-अपनी इच्छाओं को पूरा कर पाएंगे।

कभी-कभी लगता है, पिछले आठ साल से हर कहानी मेरी नजर से गुजर चुकी है। इतनी सारी कहानियां, और फिर भी... भाबी की लिखी बातें किसी अलग ही दुनिया की तरह लगती हैं।

हर कोई जानता है, भाभी के साथ छेड़छाड़ में कुछ खास बात होती है।.

मेरी ज़िंदगी में ऐसा एक पल भी आया, जब भाभी के साथ बढ़ते रिश्ते ने अपना रूप बदल लिया।

गर्मी के दिन थे, आज से लगभग पाँच साल पहले की बात है। उस वक्त अगर कोई दिन में दो बार नहीं नहा पाता तो उसका शरीर ऐसे चिपकने लगता, मानो धूप में काम करते किसी मजदूर की त्वचा हो।

पड़ोस में एक नई परिवार किराये पर आकर रहने लगी। इस परिवार में तीन लोग थे - विजय कुमार, उनकी पत्नी मीहा (नाम बदला हुआ), और चार साल का बेटा। विजय के परिवार का हमारे घर से पहले से ही नाता था। वजह? भाभी हमारी दुकान पर सामान खरीदने आया करती थीं। अक्सर भैया भी दुकान पर दिख जाते थे, कुछ लेकर जाने के लिए।

हर बार मीहा भाबी के आने-जाने पर मैं सलाम कर लेता। अब वो मदद चाहें तो कॉल करके दुकान से सामान ले सकती हैं, इसलिए मैंने अपना नंबर दे दिया।.

उसकी मस्त गांड, जो बाहर को झांक रही थी, किसी के दिमाग पर सवार हो सकती थी। मीहा भाबी की उम्र लगभग 24 साल थी, छोटे-छोटे 34″ के चुच्चे भी थे। विजय भैया के मामले में बात करें, तो वो लगभग 40 के आसपास के होंगे।

विजय, जो उसके पति थे, सरकारी दफ्तर में काम करते थे। शराब रोज़ के इस्तेमाल से शरीर ढलने लगा था। काम पर जाना कम हो गया था, चाहे नौकरी सरकारी हो।

एक दिन एक अजनबी नंबर से फोन आया। उस पर लड़की बोली, "मैं मीहा हूं।" वह बोली, तुम घर आ सकते हो क्या?"?

पैसे मिलने के बाद मैं भाबी के घर से निकल पड़ा। उन्होंने दवाइयां लाने को कहा था, इसलिए पर्ची हाथ में लेकर बाजार की ओर चल दिया।

उस दिन बाज़ार से वो दवा लेकर आया, फिर जेब में चिपके सिक्के भाबी की ओर बढ़ा दिए।

मेरी भाबी ने शुक्रिया अदा किया, इसके बाद भैया ने भी आभार जताया।

मैंने उन दोनों से कहा - इसमें किसी तरह के शुक्रिया की ज़रूरत नहीं। जब भी मेरी डाक पड़े, बस फोन कर लेना।

धीरे-धीरे मैं उनसे मिलने लगा, तो उनके दिल में मेरे लिए भरोसा आने लगा। फिर कभी-कभी भाबी मुझे फोन करके सामान के लिए बुला लेतीं। ऐसे मौके पर मैं उनके घर जाने लगा, कभी धीमे से छूता, कभी गलती से उनके चुच्चे दब जाते। एक बार ऐसा हुआ तो वह नाराज़ नहीं हुईं, बस हल्के से हंस दीं।

अब तो भाबी को मेरे इशारों का मतलब पकड़ आने लगा था।

जब से मुझे पता चला कि भैया की तबीयत खराब रहती है, तभी से लगने लगा कि शायद भाबी का संबंध ठीक नहीं चल पा रहा। इसलिए उनकी ज़िंदगी में कुछ कमी सी रहती होगी।.

उस दिन जब मैंने उससे मिलने की बात कही, तो वो बोली - मैं शादीशुदा हूँ, ऐसा करना हमारे लिए सही नहीं होगा।

फिर भी ज़िद पकड़ने से वो हाँ कर बैठी, शाम आठ बजे घर आने की बात तय हुई।

बाहर निकलते वक्त मैंने कहा कि एक साथी के साथ वक्त बिताऊंगा। देर रात तक घर लौटने की बात पर टालमटोल की गई।

उसी शाम के आठ बजे के आसपास मैं वहाँ पहुँचा। बातचीत का आगाज़ हुआ, विजय भाई के साथ।.

बहन ने बस इतना कहा कि तुम उधर वाले घर में चले जाओ। पीछे वाली हवेली अभी-अभी उनके नाम हुई है, फिर वहीं रहने का इरादा है। अपने आदमी से बोली, साफ‍-सफाई में थोड़ी देर लग जाएगी, नहा-धोकर आऊंगी।

पहले ही मैं उस घर के अंदर जा चुका था।

थोड़ी देर में वो फिर से दरवाज़े पर खड़ी थी। उसके बाल गीले थे। बोली, अब नहा लेती हूँ।

कमरे में प्रवेश करते ही भाभी ने ताला नहीं डाला, सोच-समझकर।

खुले दरवाज़े से बाथरूम का नज़ारा हो रहा था, मैं तभी बैडरूम में बैठा हुआ था। पास ही लगा उसका दरवाज़ा, इसीलिए आसानी से दिख रहा था।

कमरे में बैठे-बैठे मन में ख्याल आया - अबे, भाबी के साथ वाशरूम में हल्का फुदका मस्ती कर लेना कितना ज़बरदस्त होगा।

अचानक मैंने सभी कपड़े जल्दी से उतार दिए। बाथरूम में कदम रखते ही पीछे से भाबी के छाती पर हाथ डाल दिया। वो मुझे देखकर चमक गई। दोनों हाथों में साबुन लिए, आपस में धोने लगे।

नहाते वक्त मैंने भाबी के एक स्तन को मुँह में लिया, चूसने लगा। दूसरे के निपल पर उंगलियाँ फिर गईं, दबाव डालते हुए।

उसकी भाभी धीमे से बोल पड़ी, अपने छाती के दूध को खींचते हुए - फिर एकदम ऊंची आवाज में, "अरे मेरे यार… उफ़… हाँ… और तेज करो… सब कुछ निकाल डालो, दोनों तरफ!"!

भाभी ने धीरे से मेरे लंड को हाथों में लिया, फिर उसके होठों ने इसे घेर लिया। मुंह में लेते ही मैं ऐसे झटके से ऊपर उठा, मानो कहीं दूर खो गया हूँ।.

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थोड़ी देर चूसने के बाद मैंने अपना सारा सेमन भाभी के मुँह में डाल दिया, उन्होंने हर बूँद को ध्यान से निगल लिया।

फिर हम दोनों पलटकर एक-दूसरे को छूने लगे। मैंने जैसे ही उससे लंड चूसने को कहा, वो सीधे मेरे प्राइवेट पार्ट पर मुँह ले गई।

थोड़ी देर के बाद जब मेरा लंड खड़ा हो गया, तो मैंने उसे बाथरूम में जमीन पर लिटा दिया। इसके बाद मैंने धीरे से अपना लंड उसकी चुत में डाल दिया। वहाँ घुसने में काफी तकलीफ हुई, क्योंकि उसके पति ने लगभग कभी उसकी चुदाई नहीं की थी।.

फिर बोला वह - ऊँची आवाज में… प्रभु, और ऊँची!

उसके स्तन इस तरह झूल रहे थे, मानो पेड़ पर फल लदे हों। मैंने एक को होठों में ले लिया, चूसने लगा, दूसरे पर उंगलियाँ घूमा रहा था। वो कराह उठी - ओह…ओह…ज़ोर से…पूरा अंदर तक…अब…ओह!

लगभग दस मिनट के बाद, वह उसकी चूत में पूरा माल डाल चुका था।

फिर हमने नहाना शुरू किया, करीब दस मिनट बाद बैडरूम की ओर बढ़ गए।

अंदर पहुँचते ही चुम्बन शुरू हो गए। फिर भाभी बोली - जो करना है, मैं करूँगी, तुम बस आराम से लेटे रहो।

उसके बाद भाभी ने अलमारी के खाने से एक छोटी शीशी निकाली। धीरे से वो तरल मेरे ऊपर गिरा दिया। उनके होठ चिपचिपे आवेग में आगे-पीछे होने लगे। मानो कोई बच्चा मिठाई पर जी जान झोंके।

शहद मैंने उसके होंठों पर भी लगाया, फिर धीमे से चूसा - वो तुरंत बेकाबू हो गई।

वो बोली कि मैं 69 की हालत में आ जाऊँ। इस वक्त मेरे साथ पहली बार किसी ने ऐसा किया था। मेरा लंड उसके मुँह में था, वो खुशी से चूस रही थी। मैं उसकी चुत पर ध्यान दे रहा था, अपने तरीके से।

लगभग दस मिनट के भीतर, उसकी चुत चूसते हुए मैंने दो बार अपना नमकीन पानी छोड़ दिया। सारा तरल मेरे मुँह में आया, मैंने पूरा पी लिया।

उस पल वो घोड़ी बन चुकी थी, मैंने सिर्फ कहा था।

जैसे ही मैंने अपना लंड उसकी चुत में डालना शुरू किया, वो फिसलकर सीधा गांड में चला गया। वो चिल्लाने लगी - उइइइई मां... छोड़ दे मुझे... मैं मर गई... आह... इतना दर्द हो रहा है।

गांड मरवाने की बात पर भाबी बोलीं - इतने सालों में कभी हुआ ही नहीं।

उसने मुझसे कहा - आराम से करना, इस बार तकलीफ नहीं होगी।.

मैंने आहिस्ता से उसकी पीठ पर हाथ फेरा। इसके बाद कुछ लय में बढ़ने लगे थे, ग्यारह मिनट तक कुछ ऐसा ही चलता रहा। जब एकदम तेजी आई, तो मैंने सब कुछ वहीं खत्म कर दिया, हवा में सिसकियाँ भरी और शांति से उतर आए।

उस रात मैंने भाबी को तीन बार पूरा कियa, ऐसे ही चलता रहा सब कुछ।

मेरी चुदाई देखकर वो बहुत खुश हो गई, फिर बोली - तेरे भाई साहब से कुछ नहीं हो पाता। महीने में सिर्फ एक या दो बार ऐसा होता है। जैसे ही शुरू करते, उनका छूट जाता है, मैं अधूरी रह जाती हूँ। आज तूने मेरे जीवन में प्यार का स्वाद भर दिया, जिससे मैं तृप्त हो गई हूँ।

मज़ा आया, जब मैं उसके साथ रहा।

एक-दूजे के पास थोड़ी देर बिताने के बाद, कपड़े धीरे से पहने। फिर मैं खामोशी से उसके घर से बाहर निकल गया।

फिर उसने अपनी पड़ोस में रहने वाली दो लड़कियों को भी मेरे साथ संबंध बनाने के लिए कहा।

उसके पति की मौत शराब की वजह से हुई, फिर उसने किसी और से निकाह कर लिया। कभी-कभी बाज़ार में टकराते हैं, मैं सिर हल्का झुका देता हूँ तो वो भी जवाब में थोड़ा मुस्कुरा देती है। इसके बाद एक भी पल ऐसा नहीं आया जब मैं उसकी गर्मजोशी को छू पाता।

कैसी लगी मेरी भाभी की कहानी? पहली बार ऐसा कुछ लिखा मैंने, फिर आप तक पहुँचाया। अब तुम्हारी बारी है - खुलकर बोलो, क्या दिमाग में आया।.

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