भैया और बहन, ससुरालवालों के साथ मिलकर एक साथी के साथ शारीरिक संबंध

Jan 2, 2026 - 15:47
Feb 18, 2026 - 19:32
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भैया और बहन, ससुरालवालों के साथ मिलकर एक साथी के साथ शारीरिक संबंध

मैंने अपनी बहन के साथ संबंध बनाए, फिर पत्नी के साथ भी हुआ, वो सब मेरे जीजा के साथ हुआ। इसके बदले में मैंने अपनी बहन की चूत और गांड दोनों में धुलाई की। चारों ने एक ही बिस्तर पर शारीरिक संबंध बनाए। एक लड़की के भीतर एक साथ दो लिंग डाले गए। मैं और मेरी पत्नी, जिसका नाम कुक्कू है, दोनों आवेगी स्वभाव के हैं।

शादी के बाद से हम दोनों में जुड़ाव कभी कम नहीं हुआ। कुक्कू के साथ रिश्ते में गर्मजोशी बनी रहे, इसलिए प्यार के तरीके भी ढूंढते रहते हैं।

तकरीबन तीस साल की उम्र में मेरी पत्नी का फिगर 34-26-34 इंच का है।.

वह सेक्स में खूब रुचि रखती है। बात-बात पर उसके मुंह से चुदाई के ज़िक्र निकलते हैं।.

सनी मेरी सौतेली बहन है।

अभी-अभी उसका निकाह हो गया है।!

उसकी पत्नी के साथ सनी का रिश्ता कुछ ऐसा है, जैसे दो पुराने दोस्त।

उन दोनों के बीच बातें चलती रहती हैं, छिपी हुई बातें। पति-पत्नी कैसे सोते हैं, किसे क्या अजीब आदतें हैं, ऐसे मामले वो साफ़-साफ़ बयान कर देती हैं।

मेरी बीवी कुक्कू ने मुझसे बताया, “आपकी बहन आपके बारे में जानने के लिए कुछ ज्यादा ही फोर्स करती है! कहती है, ‘बताओ ना भाभी, भैया कैसे करते हैं!'”

उस दिन मैंने कुक्कू को इग्नोर करते हुए चले जाना तय किया।

उस रात, जब हम दोनों कुछ पलों के लिए एक-दूसरे के साथ थे, बीच-बीच में शब्द आगे-पीछे हो रहे थे।

मैंने अपनी बीवी से पूछा, “सनी और क्या पूछना चाहती है?”

ऐसे सवाल किया, तोहफे की तरह उठाया मैंने।

कुक्कू ने बताया, “आपकी बहन सेक्स को लेकर खुले विचारों की है! बल्कि राकेश, उसका पति, भी खुले विचारों का है। उसका बस चले तो वो आपके साथ भी सेक्स कर ले!”

मैंने चौंककर कहा, “ये क्या बात हुई! वो मेरी बहन है, मैं ऐसा कैसे कर सकता हूँ!”

कुक्कू ने कहा, “उसने तो ये भी कहा कि उसके पति को भी मेरी और तुम्हारी सेक्स पोजीशन जानने में बड़ा इंटरेस्ट है! उसे अपने भाई में और उसके पति को साले की बीवी में कुछ ज्यादा ही इंटरेस्ट लगता है!”

“तुम्हें भी है क्या किसी और में इंटरेस्ट?” मेरी कुक्कू ने मुझसे पूछा।

मैंने कहा, “सच बताऊँगा तो तुम्हें बुरा लग सकता है!”

कुक्कू ने कहा, “सच बताओ, चाहे कुछ भी हो, मैं बुरा नहीं मानूँगी! यही कहोगे ना, ज्यादा से ज्यादा, कि किसी और औरत को चोदना चाहते हो!”

मैंने कहा, “नहीं, मैं सनी को चोदना चाहता हूँ! उस पर मेरी नजर तुमसे शादी होने से पहले से है, पर मैं कभी हिम्मत नहीं जुटा पाया। अब तुम मेरी मदद कर दो!”

कुक्कू ने कहा, “मैं मदद तो कर दूँगी, पर तुम्हें मुझे राकेश को भी सौंपना होगा, ताकि मैं स्वैपिंग के बहाने उसे पटा सकूँ!”

मैंने कहा, “तुम्हें ऐतराज नहीं तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है!”

राकेश को सवाल किया, फिर कुक्कू ने पूछा - सनी ने।

उन दोनों की तैयारी ऐसी, मानो समय का इंतज़ार ही नहीं।!

उसके बाद हम दोनों ने मिलकर घर पर क्या करना है, सब सुनिश्चित किया।

सिर्फ सोचते ही एक बार मैं कांप गया था। सनी को छूने का ख्वाब अब पूरा होने वाला था।!

घर पहुँचते ही उनके कदम समय से मेल खा गए।

उनके आगमन पर हमने मुस्कुराते हुए सीधे हॉल की ओर कदम बढ़ाया।

हर किसी की नज़रें एक दूसरे पर थीं।

फिर मेरी बीवी ने कहा, “चलो, आज अभी से सब स्वैप हो जाए!”

फिर मैं सनी के पास जा बैठा, वहाँ राकेश कुक्कू भी थे।

मैंने खुले तौर पर सनी से कहा, “मैं तुमको हमेशा से चोदना चाहता था! आज सारी कसर निकाल लूँगा!”

सनी ने कहा, “मेरी चूत आप कभी भी फाड़ सकते थे और अब भी फाड़ सकते हो! मुझे कुक्कू समझकर चोदो!”

मेरी बीवी ने कहा, “जोश देखकर लगता है कि ये मादरचोद मुझे अब सनी समझकर चोदे तो मुझे ज्यादा मजा आएगा!”

राकेश ने सीधे कुक्कू को गाली दी, “माँ चोद! इतना सुनने के बाद भी नंगी नहीं हुई तू!”

कुक्कू ने कहा, “भड़वे, नंगी तुझे करना है!”

बस इतना कहने में आए थे, कि राकेश ने कुक्कू के सारे कपड़े उतार लिए।

ये देखते हुए मैंने सनी से कहा, “वैसे तो बहुत बेशर्म बनती हो, पर अभी भी कपड़े पहने बैठी हो!”

सनी ने कहा, “मादरचोद, अभी तक कपड़े तूने भी तो नहीं उतारे!”

सनी के कपड़े मैंने उतारे, फिर अपने भी उतार दिए।

उस वक्त मैंने सीधा सनी के मम्मे पर हाथ रखा। फिर बोला, “इतना तेज़ चोदूंगा कि राकेश का नाम याद न आए।”

सनी ने कहा, “तो चुदवाने ही तो आई हूँ! चोद भाई अब! आह, बहन चोद, काट क्यों रहा है? धीरे-धीरे खा!”

राकेश उधर कुक्कू के मम्मे को इस तरह से दबा रहा था, मानो अंदर का सारा दूध बाहर आ जाए।

कुक्कू ने कहा, “आज मुझे गर्भवती करके ही मानेगा क्या!”

राकेश ने कहा, “नहीं करूँगा तो तेरे दूध कैसे पियूँगा!”

मैंने कहा, “कर दे उसे गर्भवती! मैं तो सनी को कर ही रहा हूँ!”

राकेश बोला, “आज इसकी चूत का भोसड़ा बनने वाला है!”

मैंने कहा, “बहना, मेरा लंड कैसा है? देख, साइज बर्दाश्त तो कर लेगी ना!”

वो चूसते हुए बोली, “तुम्हें क्या पता मेरी खुशी! अगर समाज का डर न होता तो इसे लेकर भाग जाती!”

उसकी पत्नी के साथ राकेश 69 में जुड़ा हुआ था, वहीं सनी के साथ मैं भी उसी मुद्रा में था।

तभी सनी के ऊपर कुक्कू की पेशाब आ गई।

उन्होंने कहा, “वॉशरूम कहाँ है?”

मैंने कहा, “यहीं करो! अगर हगना है तो हमारे ऊपर हगो!”

एक ने झाग छोड़ा, मैंने उसे पी लिया। दूसरे का भी हश्र वही हुआ, सब कुछ अंदर चला गया।

मैंने कहा, “चल, भाईचोद, अब लंड लेने को तैयार हो!”

फिर भी सनी के मन में कुछ और ही ख्याल था, कुक्कू को देखकर उसकी आँखों में चमक आ गई।

दोनों ने कहा, “आप दोनों एक साथ एक को चोदोगे! एक गांड मारेगा और एक चूत!”

राकेश ने कहा, “आओ, पहले नंबर कुक्कू का लगेगा!”

पीछे हट गया मैं।

राकेश ने धीमे से अपना लंड कुक्कू की चूत में प्रवेश कराया।

मैंने अपना लंड कुक्कू की गांड में धकेल दिया। सनी उसके मुँह में चूत घुसा रही थी, जबकि कुक्कू हलचल कर रही थी।

थकाऊ मेहनत के बाद, सनी की बारी आई।

सनी की चूत चाटने के तुरंत बाद मैंने अपना लंड आगे निकाला, फिर उस पर पेशाब कर दियa।

सुबह के उजाले में राकेश ने लंड सनी की गांड में घोंप दिया।

कुक्कू चुदाई के बाद बेहोश पड़ी थी, मगर राकेश ने ऐसा किया कि उसकी आंखें खुल गईं। उसने उसे जबरदस्ती ऊपर उठाया, फिर चेहरे पर पेशाब कर दिया। होश तभी लौटा।

वो बोली, “और चोदो! और चोदो! एक साथ चोदो! फाड़ डालो! चूत में दो लंड एक साथ डालो!”

हम दोनों ने मिलकर उसकी ख्वाहिश पूरी कर दी। बाद में घंटों तक एक ही स्थिति में जारी रखा।

उधर सनी के चुतड़ में गुदगुदी होने लगी थी।

सनी के दोनों मम्मों के बीच में मैंने अपना लंड डाला। फिर उन्होंने उसे दबोचा, तो लावा छूटकर सीधे सनी के चेहरे पर जा लगा।

आगे से चूत में घुसा दिया, फिर पीछे से राकेश को गांड में डालने के लिए बुलाया, ठीक वैसे जैसे सनी चाहती थी।

गंदगी में पड़ा दूध, उसे झपटकर चख लिया करते थे।

थकान थी, तो बस सो लिए - कपड़े भी नहीं पहने।

एक सप्ताह के लिए योजना बनी, जहाँ कपड़े पहनने की मनाही थी।

चारों में से हर किसी ने दूसरे के साथ ज़बरदस्त ढंग से शारीरिक संबंध बनाया।

मगर ऐसा हुआ कि राकेश ने मेरे साथ-साथ मेरी भी पिटाई कर दी।

उस वक्त नींद आती थी, फिर कभी कहीं दूसरे साथी के साथ होता जुड़ाव।

कभी-कभी हम निशाना बनाकर खेलते थे, उस पर तीन आदमी साथ मिलकर झपटते।

बाद में बताता हूँ कि क्या करना है।

कहानी का मज़ा लिया होगा तुमने।.

मेल के ज़रिए या कमेंट में लिखकर बता दो।.

मुझे अच्छा जवाब मिलेगा, तो कहीं न कहीं फिर से लिखना होगा।!

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