भाभी ने अपने पति की ग़ैर मौजूदगी में मुझसे अपनी चूत को चुदवाया l

Jan 2, 2026 - 13:46
Jan 13, 2026 - 19:45
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भाभी ने अपने पति की ग़ैर मौजूदगी में मुझसे अपनी चूत को चुदवाया l

एक इमारत में पैसे वसूलने गया था मैं। उस दिन धधकती गर्मी थी, किसी औरत ने ठंडा शरबत दिया। अंदर कुछ घुला हुआ था, ऐसा लगा जब पी लिया। आँख खुली तो देखा - उसके होठ मेरी तरफ बढ़ रहे थे।.

अरे भई लंड के धनी और मीठी चूत वाली दोस्तों। हर किसी को बधाई।!

पटना में जीता-जागता हूं मैं, नाम मोहन है मेरा।

उम्र बाईस साल की है, त्वचा गेहुएं रंग की है। ऊँचाई पांच फुट नौ इंच की है। लिंग की लंबाई सात इंच है। मोटाई तीन इं की है।

लंबा होने के बाद भी, मैं अंडरवियर से दूर रहता हूं क्योंकि जींस हमेशा पहने चलता हूं।

लंबाई कम दिखने लगती है, जब वह पहन लेता है।

पैसा लेने का काम मुझे केबल सर्विस में मिला है।

एक गाँव की महिला की कहानी है ये, सच्चाई पर आधारित। पढ़ने के बाद जो मन में आए कर लेना - उंगली चूत में डाल लेना, लंड हिला लेना, कुछ भी। कहानी खत्म होने तक ध्यान बना रहे।

अब मैं बात करने लगता हूँ एक साधारण ग्रामीण महिला के अनुभवों के बारे में।

एक सरकारी इमारत की बात है, मैं अंदर पैसों का हिसाब चुकाने आया था।

इमारत के अंदर पाँच मंज़िलें थीं। हर मंज़िल पर दो घर बने हुए थे।

कुल मिलाकर, वहाँ दस परिवारों का होना था।

महीना था जून।

सुबह के दस बजे, जैसा कि हमेशा, मैंने ऑफिस के गेट से पैर बाहर रखा।

नीचे उतरा तो वहाँ पैसे लेने के लिए मौजूद था वो आदमी।

सूरज की रोशनी में बहुत तेजी थी।

धूप इतनी तेज़ थी कि सिर घूमने लगा।

आँखों में धुंधलापन फैलने लगा।

ऊपर की ओर पैर उठाते हुए मुझे पाँच तले की सीढ़ियाँ चढ़नी थीं।

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सीढ़ियों पर जगह मिल गई तो वहीं ठहर गया, ऊपर जाने की जरूरत नहीं लगी।

एकाएक सोच आई, क्यों न कुछ ऐसा पढ़ लिया जाए जो गहरा हो।

एक दिन के बाद मैंने हिंदी में सेक्स कहानियों की वेबसाइट ढूंढ ली। फिर धीरे-धीरे गर्म भाभी की कहानियाँ पढ़ने लगा।

जब कहानी खत्म हुई, तभी मैं ऊपर उठने लगा।

ऊपर पहुँचकर मैंने घंटी छेड़ दी।

उन्होंने दरवाजा खोला।

आँख उठी तो भाभी नजर आई। ऐसा लगा जैसे कुछ पल के लिए सब कुछ रुक सा गया हो। फिर विचार आया कि अब बस कुछ भी हो जाए।

ऊपर के तल पर भाभी का कमरा था। घर में कोई एयरकंडीशनर नहीं चलता था, बस छत के पंखे के नीचे कूलर रखा हुआ था।

उस दिन भाभी की ड्रेस घुटनों से ऊपर तक ही थी। कंधे पर महज़ एक पतली पट्टी थी, जो आधे बूब्स तक ढक रही थी।

उसकी ब्रा कहीं गई हुई थी, सिर्फ पैंटी का जालीदार किनारा दिख रहा था।

उस पोशाक में इतना कम कपड़ा था, सिर्फ आधे स्तन और योनि छुप रहे थे।

सब कुछ साफ़ नजर आ रहा था, बस।

दो साल से मैं भाभी के घर आता आया हूँ, पर इस बार उसने एक अजीब कपड़ा पहना था - आगे से छाती का आधा हिस्सा झांक रहा था।

मेरी भाभी का नाम सुनकर हो सकता है आप पहले से कुछ जानते हो - वो शालिनी थी। उसका फिगर में अंक थे 30-28-30, इस बारे में कई बार घर में चर्चा हुई।

घर में तो बस दो ही आदमी थे - एक वो, एक उनका पति।

वो आदमी अक्सर दूर रहता था, घर में कभी नज़र नहीं आता।

थोड़ी देर पहले हॉट भाभी की कहानी पढ़ने के बाद मेरा लौड़ा अब भी ऊपर था।

उसका निकलने का इरादा था, मेरी जींस फटती हुई पीछे छूट गई।

अचानक भाभी ने कहा - जल्दी अंदर आइए, वरना कमरा गर्म होने लगेगा।

फिर मैं तेज़ी से कमरे में घुस गया।

पल भर में उनकी निगाह मेरी पतलून पर जा टिकी।

ऊपर जाते वक्त पता चला, जींस की चेन ढीली पड़ गई है। खराब होने की वजह से वो सीढ़ियों पर अपने आप खिसक जाती।

उसके जींस में लंड की मोटाई दिख ही गई।

उस पैंट में मेरे लिंग का आकार दिख ही जा रहा था।

हर कोई उसकी आकृति पर नज़र डालते ही समझ जाता - लंबाई कितनी होगी मेरी।

मुस्कान उनके चेहरे पर थी, वो तब भाई की पत्नी को घूरते हुए दिखीं।

हल्की सी मुस्कान किसी के चेहरे पर हमेशा रहती थी।

दो साल से भाभी के घर जा रहा था मैं, पहचान तो बन ही गई थी।

भाभी को मैंने बताया - थोड़ा शरबत देना पड़ेगा, धूप इतनी तेज है कि चक्कर सा आ रहा है।

लस्सी लेकर आऊंगी, बस थोड़ा इंतजार करना।

एक भरपूर गिलास में उन्होंने लस्सी सौंप दी, मैंने हड़बड़ाकर सारा निगल डाला।

थोड़ी लस्सी पीने के बाद, टीवी पर सिग्नल ही गायब था। फिर मैंने खुद उसे सही कर लिया।

पैसे के लिए वो भाभी दूसरे कमरे में चली गई।

थोड़ा समय लगा, पर मैंने लंड को इतना संभाला कि कहीं बाहर न झांके।

जैसे ही मैंने जींस का बटन खोला, लंड धीरे से बाहर निकल पड़ा।

फिर अचानक वहाँ भाभी पहुँच गईं।

जब मैंने उन्हें देखा, सामने कुछ धुंधला हो गया। फिर जमीन पर बैठते-बैठते महसूस किया कि शरीर ढह रहा है।

थोड़ी देर बाद होश वापस लौटने लगा।

एकदम अचानक से पता चला कि कोई मेरी तरफ़ झुका हुआ है।

शरीर सुन्न पड़ा था, मैं उठने लगा फिर भी कुछ हिला नहीं। आंखों के ऊपर जैसे कोई बोझ टिका हो, खुलती ही नहीं थीं वो।

अचानक ख्याल आया - शायद चक्कर की वजह से नहीं, बल्कि भाभी ने लस्सी में कोई चीज़ मिला दी है, जिसने मेरा होश उड़ा दिया।

थोड़ी देर से भाभी की आवाज़ सुनाई देने लगी। उनके मुंह से निकला - इतना बड़ा लंड अगर चूत में घुस गया, तो पैराडाइस का एहसास होगा।

मेरी भाभी धीरे से मेरे लिए इशारा कर रही थी।

कभी-कभी तो यह भी लगता था कि मैं किसी ख्वाब के अंदर हूँ।

अब तो सिर्फ इतना पता था कि कोई मेरी गांड कर रहा है, और मैं बस वैसे ही पड़ा रह गया।

वो मेरा लंड पूरा निगलती जा रही थी, गले तक खींच रही थी।

लगभग दस मिनट तक मुँह से छेड़ने के बाद वो मेरे ऊपर चढ़ गई।

धीरे-धीरे वो सुस्ती कम होने लगी थी।

वह मेरे ऊपर आई, फिर अपनी चूत से लंड को घिसने लगी।

वह लड़की की चूत पहले ही तर चुकी थी, फिर लंड छूते ही और भी नम हो गई।

लगभग दो मिनट तक लंड को हाथ से रगड़ने के बाद भाभी ने टोपे को चूत के ऊपर रखा, फिर धीमे से अंदर खींचने की कोशिश की।

सिर पर टोपी बिल्कुल फिट नहीं हो रही थी, क्योंकि मेरी टोपी धमून से थोड़ी मोटी थी।

महीने में बस एक या दो बार ही कभी-कभी भाभी को प्यार होता। उस छोटे से 5 इंच के लिए।!

कारण यह था कि चूत के मुंह पर पूरी तरह से खुलने का अभाव था।

थकी हुई सी भाभी नारियल का तेल खरीदने बाज़ार चल पड़ी।

होश वापस आते-आते मुझे खुद पर यकीन नहीं हुआ।

भाभी अचानक कदम रखते हुए नारियल तेल लाई। उन्होंने मेरे लंड पर धीरे से हथेली फैला दी।

वह अपनी उंगली पर थोड़ा सा नारियल तेल लगाकर, धीमे से चूत में अंदर तक घुसा दिया।

बार-बार वही जगह उसकी पसंद बन गई।

बार फिर वह ज़ोर से नीचे बैठी, तभी लंड भीतर की ओर तीन इंच धंस गया।

मुंह से एक आह निकल पड़ी, भाभी के।

ऊपर-नीचे होते हुए भाभी सिर्फ पांच इंच लंबा लंड अंदर उतार पा रही थी।

वो भाभी इतने शौक से तमाम कर रही थी, मानो अब तक कुछ नहीं छुआ हो। उसके हर हिस्से में धड़कन थी, जैसे सब कुछ पहली बार हो रहा हो।

हाथ उठते ही भाभी ने छाती पर से चला दिया, फिर बूब्स के साथ निप्पलों पर भी दबाव डालने लगी।

हाथ का सहारा खिसकते ही सात इंच का लंड चूत में पूरी तरह धँस गया।

मुँह से एक तेज़ आवाज़ निकल पड़ी - ऊईई ईई मा… खत्म हो गई… ऊई ईईई उफ्फ… मेरी चूत।

थोड़ी देर के लिए वह जगह पर ही रुक गई।

धीरे-धीरे उसके हाथ लंड को बाहर खींच आए।

इस बार उसने धीमे से शुरुआत की, फिर तेज़ी से आगे बढ़कर पूरा लंड मुँह में ले लिया।

दर्द कम नहीं हुआ था, फिर भी वो सारा का सारा अंदर समा गया।

भाभी को उसके मोटे लंड से परेशानी हो रही थी।

खुशी के बावजूद मन में एक सूनापन था।

तो फिर भाभी ने धीरज बनाए रखना अच्छा समझा।

दर्द में जब थोड़ी राहत मिली, तब वह लंड पर कूदने लगा।

थोड़ी देर में ही उसने लंड पर जोर से कूदना शुरू कर दिया।

भाभी को अब लंड से चुदाई में मज़ा आने लगा। उसके होठों से ओह… हम्म… जैसी ध्वनियाँ निकल पड़ीं।

भाभी के अंदर उमड़ रहा था जोश, सांसें तेज हो गई थीं - ऊपर से आवाज़ फूटी, मोहन… हल्का सा झुकाव हुआ, शरीर ढीला पड़ गया। एक धक्के के बाद चीख निकल पड़ी, चूत में दर्द घर कर गया। फिर वही आवाज़, टूटती हुई, चुद गई मैं… पूरी तरह। आखिरी सांस में बस इतना, खत्म कर दे इसे… निकाल ले सब कुछ।

इतने में तुरंत उसकी चूत से रस छलक पड़ा।

पानी बहने लगा तो भाभी के हिलने में चुस्ती आ गई।

उसने आँखें बंद किए हुए, मेरी तरफ छलांग लगा दी।

उसकी छातियाँ हवा में ऊपर-नीचे हो रही थीं।

इतना देखकर मेरा दिमाग सुन्न हो गया था।

मुझे लगा, किसी तरह उनके स्तनों को छूने का मन हो रहा था। एकदम अचानक हल्का झटका देने का विचार आया।

फिर भी मैंने कदम रोक लिया, धीरे से एक तरीका सूझा।

वो लगातार मेरे ऊपर झुकी हुई थी।

गाड़ी के तेज चलने से महिला फिर से नीचे गिर पड़ी।

इस बार मैं भी उसकी योनि में तेजी से वीर्य छोड़ते हुए लड़खड़ा गया।

चूत में वीर्य के छींटे उतरते महसूस हुए, भाभी को।

उसका वीर्य चूत में जाते ही वह बहुत खुश हो उठी।

ऐसा माहौल था, मन लग गया कहीं ऊपर हो।

वीर्य धीमे-धीमे भाभी की जांघों पर बहने लगा था।

इसके बाद एक नाटक करने की योजना मन में आई।

उठकर सीधा हो गया मैं, पैंट चढ़ाते हुए बोला - इसने मेरे साथ ऐसा क्यों किया तुमने?

खिसकते हुए मैं सीधा हॉल की ओर चल पड़ा।

उसी पल भाभी के हाथ मेरे हाथ में आ गए।

अचानक आँखों से आंसू बह निकले, धीमे स्वर में बोली - मोहन, सुन लेना मेरी एक बात, जो भी कहना तुम, उसे मैं कर दूंगी।

मेरी नज़र उसके आंसुओं पर पड़ते ही सब कुछ ठहर गया।

उसने आगे कहा, पत्तों की तरह उधड़ते खयालों में जब उम्र 19 की थी, तब शामें गुजारने का दिल करता था। फिर भी चौखट के पार जाने की इजाजत नहीं मिलती थी।

उसने आगे कहा - दो साल तक किसी तरह उंगली डालकर मन लगाए रखा। इक्कीस साल की उम्र में परिवार ने जबरन शादी कर दी। पति सरकारी नौकरी में था, घर आने का नाम ही नहीं लेता था।

एक बार फिर कहना चाहूंगी - अभी भी प्यास लगी रहती है। पति घर आते हैं, थककर चूर होते हुए। सीधे बिस्तर पर गिरते हैं, नींद में डूब जाते हैं। मेरी तड़प वहीं ठहर जाती है, छूटी रह जाती है।

वो बोली, प्यास लगी रहती है मुझे। पति कभी-कभी संभोग करे, तब भी महज पाँच मिनट में ढ़ेला हो जाता है। इसके बाद फिर कुछ भी कर लो, ऊठे नहीं वो दोबारा।

एक-दो घरों के अलावा, इमारत के ज्यादातर पड़ोसियों को भी यही समस्या थी। वैसे, उनमें से महज दो पति ही थे जो काम से पहले पहुँच जाते। उनके पति खेल के लिए जिम जाया करते। यह दबाव सिर्फ भाभी पर नहीं, सभी पर था।

उनकी पत्नियों को वो खूब जमकर चढ़ाते, हर शाम कोशिश में आवाजें गलियारों में घूमती।

उनकी पत्नियाँ दूसरी महिलाओं को घूरती रहती थीं, जब पति के सेक्स में हुनर की बात आती।

इसके पीछे एक वजह ये भी थी कि भाभी को अपनी ज़िंदगी में तमाम चीज़ों का मज़ा लेना आता था।

ऐसी औरतें, जिनके पति बिस्तर में तगड़े होते थे, वो खुद सख्ती से रहती थीं। कोई औरत उनके आदमी से बात करे, इसे गलत समझती थीं।

हर भाभी के लिए मकान में तेज़ आवाज़ करने का सपना पूरा नहीं हुआ।

बात सुनकर मैंने सोचा - अगर मदद कर भी दूँ, तो आप फिर कभी कुछ नहीं पूछेंगी। अभी इसलिए कह रही हैं क्योंकि जरूरत है।

उसने कहा - तुम्हें फ़िक्र करने की ज़रूरत नहीं है, मैं ना दे पाऊँ तो किसी दूसरी भाभी से वो रास्ता गुज़ार दूँगी। बस मेरा नाम तुम्हारे दिमाग़ से गायब न होने पाए।

पहले प्यार को कौन भुला पाता है, मैंने कहा - ये तो हर दिल में ज़िंदा रहता है।

भाभी ने सुनते ही मेरा आलिंगन कर लिया।

ढलते दोपहर के तीन चौथाई बजे थे, पर सासुमां आधी तब तक वस्त्रहीन ही रही।

फिर मैंने भाभी की ओर देखकर कहा - आप तो हमसे पूरा आनंद उठा चुकी हैं, अब शांति से बैठी हैं। मगर मैं तो नींद में ही था। मुझे कुछ मिला ही नहीं।

सुनो भाभी, क्या ऐसा लगता है तुम्हें कि एक बार पड़ने से मेरा भूखा दिल तृप्त हो गया? मैं इतने सालों से बिना सहारे के झूल रही हूँ। खालीपन तब तक नहीं जाता जब तक कोई मर्द मेरे अंदर धक्के न लगाए। बिना उस ठहराव के आराम नसों में नहीं घुलता। तब तक कुछ भी पूरा नहीं लगता जब तक तुम मुझे बीस तरह से न चढ़ाओ।

ठहरिए, मैं पानी लेकर आऊँगा।

मैंने बोलते हुए उसे बिस्तर पर धकेल दिया, जिसके बाद मौन में गहरे स्पर्श से चुंबन शुरू कर दिया।

वो घड़ी में भाभी ने अचानक से उसी तरह मुझे चूम लिया, जैसे कोई सपने में करे।

मैंने पाँच मिनट तक उनके होंठों के बीच अपनी जीभ सरकाये रखी। वैसे ही उनकी जीभ को धीरे-धीरे चूसता गया।

फिर वो लम्हा आया, हम दोनों ने 69 की स्थिति अपना ली।

उसकी चूत में उंगली डालकर मैंने सफाई की, स्पर्म बाहर आ रहा था।

इस बार भाभी ने गले में लंबा सांस लिया, जैसे कुछ अटका हो।

मेरी जीभ उसकी चूत में करीब 6 सेमी तक अंदर घुसी हुई थी, धीमे-धीमे चक्कर लगा रही थी।

एक बार पूरे योनि को होंठों में समेटे हुए वह चूस रहा था।

तभी वो बिना कुछ कहे मेरे सामने खड़ी थी।

हर बार जब भाभी टूटती, सेक्स को लेकर उसका दीवानापन चढ़ जाता।

भाभी ने कहा, चुसाई हो चुकी है... अब मेरी चूत चूद लो।

तुम्हें कौन सी पोजीशन में सेक्स करना पसंद है?

ऊपर वाली बोली, "मैंने अब तक सिर्फ मिशनरी में ही तजुर्बा किया है।" उधर, नीचे बैठी प्रियंका दावा कर रही थी कि उसने बीस ढंग से ऐसा किया है।

जब वो बात करता है, मेरी चूत में गीलापन महसूस होने लगता है।

ठीक है, अब समय आ गया है शुरू करने का।

इसके बाद हम दोनों हॉल की ओर निकल पड़े।

बिस्तर से उठकर वो टेबल पर लेट गई। मैंने नीचे झुककर उसकी चूत को हल्के से चाटा। फिर अपना लंड उठाया, उसकी चूत के ऊपर रखा। एकदम तेजी से धक्का दिया, जिससे आधा डंठल अंदर समा गया।

मुस्कान उनके होठों पर थी, तभी दर्द की एक सिसकी छूट गई - ओह्ह… हाँ… धीरे से।

थोड़ी देर बाद मैंने भाभी को धीमे हलचल के साथ चुदना शुरू किया।

अचानक, वह अपने दोनों पैरों को कंधे पर उठाकर हल्के-हल्के झटके देने लगा।

वह अब पूरे आनंद के साथ हिल रही थी।

आवाज़ हॉल के अंदर इधर-उधर टकरा रही थी।

मेरे भीतर का उत्साह बढ़ गया, वो फुसफुसाते हुए आवाजें सुनकर।

गर्मी के कारण पसीना छूटने लगा, हॉल में तो बस पंखा चल रहा था।

एक पैर कंधे पर टिका था, दूसरा बगल में, तभी मेरा सात इंच का लंबा धन भाभी की चुत में आराम से समा गया।

मज़ा तो सिर्फ वो जानती थी, उसके चेहरे पर ये बात खुद-ब-खुद छा गई थी।

गले को सम्भालते हुए ऊपर उठने का संकेत किय मैंने, भाभी की ओर देखकर।

वो लटक गई।

इस पोजीशन में लड़की के पैर लड़के के कंधे पर टिके होते हैं। उसके दोनों हाथ उसकी गर्दन को सहलाते हुए झूलते रहते हैं। इस बीच, लंड चूत पर ठहरा रहता है।

उठकर खड़े होने पर, मैंने जब भाभी को इस अवस्था में चोदा तो उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े - इस ढंग से गहरे हिलोरे मचते हैं।

मुझे लगा जैसे किसी ने सांस रोक ली हो। फिर आवाज़ आई - ओह, धीरे… बस थोड़ा सा रुक जाओ। एक सिसकी के साथ बोलीं - उइय्य्य्य… प्लीज, इतना तेज़ मत करो।

मुझे उन पीड़ा की आवाजों से चकरा गया।

थोड़ी देर में वह कगार पर आ गई।

उसके बस के बाहर हो गया था मेरी तिरछी-मिरची बातें सुनना।

फिर उसने अपनी जगह बदलवाने की इच्छा जताई।

पसीने से तनघटा हुआ शरीर, धीरे-धीरे हाथों की पकड़ ढीली पड़ गई।

सोफे पर गिरते हुए उसकी चीख सुनाई दी।

थोड़ी देर के लिए रुकना पड़ा, वो बहुत तकलीफ में थी।

पहली बार में ही उसकी भाभी को इतनी तेज़ चुभन महसूस हुई थी।

उसके बाद वह बोली, कम तकलीफ हो ऐसी मुद्रा में संबंध बनाओ।

मैंने कहा - सोफे पर वहीं पड़े रहो। तुम्हें कुत्ते की तरह लेना है।

उसका रूप अब कुतिया जैसा हो गया।

मैंने लंड निकाला, फिर धीरे-धीरे चोदने लगा।

अब तो हर बार उन्हें कुछ खास महसूस होने लगा।

उसका शरीर आगे-पीछे हिल रहा था, एक स्पष्ट क्रम में।

लगता है, भाभी को बहुत ख़ुशी मिल रही है।

तेजी से धक्के देने लगा मैं, गति कुछ पल में ही बढ़ गई।

वो खुशी-खुशी अपने पति के साथ तसल्ली से जुड़ी हुई थी।

उनकी आवाज़ें सुनते ही मैं पूरी तरह खो गया।

वो खुशी से बार-बार बोल उठी - आह्ह, जारी रखना… मज़ा आ रहा है… ऐसे ही आगे बढ़ते रहो… इतने सालों तक इंतज़ार किया मैंने… अब रुकना नहीं।

तेज हो गया मेरा धमाका, फिर वह पल आया कि उसकी चूत से तरल छलकने लगा।

खुशी की एक लहर उसके चेहरे पर आ गई, जब वो मुस्कुरा उठी।

उसके बाद जब वह स्त्री-रस बह गया, मैंने अपने लिंग को हाथ से साफ किया।

एक पल ठहरकर मैंने कहा - आगे बढ़ते हैं कमरे की तरफ, कूलर के पास जहाँ हवा चल रही है, इधर तपिश बहुत है।

गर्मी कम होने की बजाय मुझे और तपश्चर्या सहनी पड़ रही है। कमरे में जितनी आग है, वो मेरे अंदर के झुलसे से कहीं कम है। हवा थम गई है, धड़कनें तेज हो गई हैं। कृपया इस दहक को शांत कर दो।

हाँ, अब सिर्फ गर्मी निकालने का काम बचा है। कमरे में चलते हैं।

अंदर कदम रखते ही पसीना सूखने लगा।

तकिया सिर्फ इतनी ही ऊँची थी कि वो भाभी की कमर तक पहुँच जाए।

फिर आया पावर प्ले का पल… मतलब, हंगामा शुरू होने वाला था।

मैंने भाभी के पैरों को सहलाते हुए उन्हीं के हाथ में जोड़ दिया।

थोड़ा सा नारियल का तेल अब लंड पर डाल दिया, तभी तो सूखेपन के बावजूद चूत में आसानी हुई।

मैंने तेल लगाकर लंड को चूत में धीरे से घुसा दिया।

हाथों में दोनों बूब्स समेटते ही मैंने जोरदार शॉट चला दिया।

मुझे लगा जैसे कोई चीख रहा है - आअ अअअ अईई … आअआ आआ आआ आहह … ओहह माय गॉड … फक … आह्ह हार्ड … ओह बेबी … हार्ड!

इन आवाज़ों को सुनकर मेरा बस हाल ख़राब हो गया, पाँच मिनट तक रुक पाना मुश्किल हो गया।

लड़की के योनि में फिर से वीर्य भर दिया गया।

थक कर मैं बेहाल सा हो चुका था, फिर वहीं उस पर ढह गया।

उसने पैर हटाए, फिर हाथ मेरे शरीर पर लपेट लिए।

दो मिनट तक हमारा कोई अलग नहीं हुआ।

शालिनी भाभी के पास तब इतना ज़ोर नहीं रहा था, मेरे लंड के झटकों को सह पाए।

उसकी चूत से कचूमर बाहर आ गया था।

उस दिन कुछ ऐसा हुआ जब वो पाँच बार लगातार गिर पड़ी।

उठते हुए हम दोनों नजर डाली गेट की तरफ, तभी ध्यान गया दो महिलाओं पर जो फोन से वीडियो बना रही थीं।

एक के चेहरे पर मुस्कान थी, दूसरी की आँखों में भी खिल उठा हल्का समंदर।

अगला हिस्सा आएगा, कहानी वहीं से बढ़ेगी।

लिखना तुम्हें इस देसी भाभी की कहानी पर क्या ख़्याल आए, मैं वो जानना चाहता हूँ।

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